खड़े रहो... अड़े रहो - By Amitabh Bachchan

गर जूनून है सर पर तेरे
और, अंतर में हो विश्वाश
फिर ठोकर और ठुकराने का
होगा कहां तुम्हे एहसाह।
मकसद में सच्चाई है तो
सीना ठोक कर यही कहो,
झुकना होगा दुनिया तुमको
विश्वाश पे अपने खड़े रहो
अडे रहो, अड़े रहो....।
दुनिया बदली है जिसने भी,
पहले उसको इनकार मिला
अपमनों का हार मिला
और तानो का उपहार मिला,
हर विश्वाश में विश्वाश भरो
लहरों के विपरीत बहो
हाथों में विजय मसाल लिए
विश्वाश पे अपने खड़े रहो
अड़े रहो , अड़े रहो....।
पूरी कविता नीचे दिए गए फोटो फाइल में है,
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